Politics

कांग्रेस के 70 साल, घोटाले अपार

साल 1948 से लेकर 2014 तक देश की सत्ता पर कांग्रेस पार्टी का राज रहा। बीच में एक दो बार अन्य सरकारें भी आईं, लेकिन कांग्रेस ने जल्द ही वापसी भी कर ली। कांग्रेस ने भले ही लगभग 70 साल तक राज किया, लेकिन जब भी पार्टी की उपलब्धियों की चर्चा होगी तो भ्रष्टाचार और घोटालों को दूर नहीं रखा जा सकेगा।

इस लेख में हम कांग्रेस के ऐसे ही कुछ घोटालों के बारे में बताएंगे जिनकी वजह से देश की अर्थव्यवस्था गर्त में चली गयी। इसमें 2जी स्पेक्ट्रम, कॉमनवेल्थ गेम्स, बोफोर्स, अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाला, कोल स्कैम शीर्ष पर हैं। यदि सभी घोटालों को जोड़ा जाए तो कांग्रेस राज में घोटालों का कुल आंकड़ा 5 लाख करोड़ को पार कर जाता है।

2G Scam

2जी स्पेक्ट्रम घोटाला (1 लाख 76 हजार करोड़)

आजाद भारत का यह सबसे बड़ा घोटाला है। साल 2010 में यह तब चर्चा में आया जब भारत के महालेखाकार और नियंत्रक (कैग) ने अपनी एक रिपोर्ट में साल 2008 में किए गए स्पेक्ट्रम आवंटन पर सवाल खड़े किए। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में कंपनियों को नीलामी की बजाए पहले आओ—पहले पाओ की नीति पर लाइसेंस दिए गए। कैग के अनुसार इससे सरकारी खजाने को अनुमानत एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। इसमें राजनीतिज्ञ से लेकर नौकरशाह और व्यवसाइयों की मिलीभगत सामने आयी थी। इस घोटाले में कई बड़े नाम सामने आए। लपेटे में प्रधानमंत्री कार्यालय और तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम पर भी सवालों के घेरे में आए।

इस घोटाले के प्रमुख नामों में एक ए. राजा: पूर्व केंद्रीय दूर संचार मंत्री और द्रमुक नेता को इस घोटाले की वजह से पहले मंत्री पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा, उसके बाद 2011 में इन्हें जेल भी जाना पड़ा।

कनिमोड़ी: द्रमुक सुप्रीमो एम करुणानिधि की बेटी उस समय राज्य सभा सदस्य थीं और इन पर ए. राजा के साथ मिलकर घोटाले करने का आरोप लगा। इनके ऊपर आरोप था कि इन्होंने अपने टीवी चैनल के लिए 200 करोड़ रुपए की रिश्वत डीबी रियलटी के मालिक शाहिद बलवा से ली। बदले में उनकी कंपनियों को ए राजा ने गलत ढंग से स्पेक्ट्रम दिलाया।

सिद्धार्थ बेहुरा: जब ए. राजा केंद्रीय दूरसंचार मंत्री थे, तब सिद्धार्थ बेहुरा दूरसंचार सचिव हुआ करते थे। सीबीआई का आरोप था कि इन्होंने ए. राजा के साथ मिलकर इस घोटाले में मदद की। बेहुरा भी ए राजा के साथ ही दो फ़रवरी 2011 को गिरफ़्तार हुए थे।

आर के चंदोलिया: ए राजा के पूर्व निजी सचिव पर आरोप था कि इन्होंने ए राजा के साथ मिलकर कुछ ऐसी निजी कंपनियों को लाभ दिलाने के लिए षड्यंत्र किया जो इस लायक़ नहीं थीं। चंदोलिया भी बेहुरा और राजा के साथ ही दो फ़रवरी 2011 को गिरफ़्तार हुए थे।

शाहिद बलवा: स्वॉन टेलिकॉम के महाप्रबंधक बलवा पर सीबीआई का आरोप था कि उनकी कंपनियों को जायज़ से कहीं कम दामों पर स्पेक्ट्रम आवंटित हुआ। बलवा आठ फ़रवरी 2011 को जेल में बंद किए गए।

संजय चंद्रा: यूनिटेक के पूर्व महाप्रबंधक चंद्रा की कंपनी भी इस घोटाले में सीबीआई के अनुसार सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक थी। स्पेक्ट्रम लेने के बाद उनकी कंपनी ने स्पेक्ट्रम को विदेशी कंपनियों को ऊंचे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफ़ा कमाया। चंद्रा को 20 अप्रैल 2011 को गिरफ़्तार किया गया।

विनोद गोयंका: स्वॉन टेलिकॉम के निदेशक पर सीबीआई ने आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने साझीदार शाहिद बलवा के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्रों में भाग लिया था।

गौतम दोषी, सुरेन्द्र पिपारा और हरी नायर: अनिल अंबानी समूह की कम्पनियों के ये तीन शीर्ष अधिकारी थे। इन तीनों पर भी षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप था। इन तीनों अधिकारियों को भी 20 अप्रैल 2011 को जेल में बंद किया गया।

आसिफ़ बलवा: शाहिद बलवा के भाई कुसगावं फ्रूट्स और वेजीटेबल प्राइवेट लिमिटेड में 50 फ़ीसदी के हिस्सेदार थे। राजीव अग्रवाल के साथ आसिफ़ बलवा को भी 29 मई 2011 को गिरफ़्तार किया गया।

करीम मोरानी: सिनेयुग मीडिया और एंटरटेनमेंट के निदेशक पर आरोप था कि उन्होंने कुसगावं फ्रूट्स और वेजिटेबल प्राइवेट लिमिटेड से 212 करोड़ रुपए लिए और कनिमोड़ी को 214 रुपए रिश्वत दिए, ताकि शहीद बलवा की कंपनियों को ग़लत ढंग से स्पेक्ट्रम आवंटित कर दिया जाएंं।

CommonWealth Games 2010

राष्ट्रमंडल खेल घोटाला (70 हजार करोड़)

देश में जब भी भ्रष्टाचार और घोटालों का जिक्र किया जायेगा तो कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले को सबसे बड़े घोटालों की श्रेण में रखा जाएगा। देश की राजधानी दिल्ली में वर्ष 2010 में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल में पैसों को लेकर बड़ी हेराफेरी की गयी थी। सरकारी रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें लगभग 70 हजार करोड़ का घोटाला हुआ। राष्ट्रमंडल खेल के लिए आवंटित धनराशि का आधा पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया, जिसमें मुख्य रूप से तत्कालीन राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी और उनके सहयोगियों का नाम सामने आया था। इस घोटाले में राजनीतिज्ञ, व्यवसायी, कई कम्पनियां और कई नौकरशाहों के नाम भी सामने आए।

सुरेश कलमाड़ी के साथ-साथ दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व श्रीमती शीला दीक्षित, राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन समिति के सचिव ललित भनोट, टी एस दरबारी, आयोजन समिति के संयुक्त महानिदेशक संजय महिंद्रू, आयोजन समिति के उप महानिदेशक बी एस लाली, प्रसार भारती के सीईओ एम जयचंद्रन, संयुक्त महानिदेशक (लेक और वित्त) ए एम फिल्मस, ए एम कार्स, एस आई एस लाइव,जेपी ग्रुप, एमटीएनएल, एचसीएल इनफोसिस्टमस, स्वेका पवरटेक इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड, जैसी बड़ी कंपनियों और बड़ी हस्तियों के नाम सामने आए।

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