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पोस्च्युरल मेडिसिन थेरेपी से डायलिसिस की जरूरत नहीं: डॉ. बिस्वरूप रायचौधरी

गुरुत्वाकर्षण बल पर आधारित पोस्च्युरल मेडिसिन किताब का विमोचन

पोस्च्युरल मेडिसिन एक क्रांतिकारी चिकित्सा थेरेपी है: गुरु मनीष

नई दिल्ली, 31 अक्टूबर, 2021: राष्ट्रीय एकता दिवस, सरदार वल्लभ भाई पटेल की वर्षगांठ के अवसर पर, 31 अक्टूबर, 2021 को हिम्स (हॉस्पिटल एंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिड मेडिकल सांइसेज) टीम ने यहां एक प्रेस वार्ता में ‘360° पोस्च्युरल मेडिसिन’ पुस्तक का विमोचन किया, जिसमें डॉ. बिस्वरूप रायचौधरी (लेखक), गुरु मनीष जी (चेयरमैन), डॉ. अवधेश पांडे (एमबीबीएस, एमडी – रेडियोलॉजी), डॉ. अमर सिंह आजाद (एमबीबीएस, एमडी- पीडियाट्रिक्स, एमडी- जनरल मेडिसिन) उपस्थित थे।

डॉ. बिस्वरूप रायचौधरी ने पोस्च्युरल मेडिसिन के विज्ञान का परिचय देते हुए कहा कि यह एलोपैथी की तुलना में कहीं अधिक तेज़, आयुर्वेद से अधिक सुरक्षित, होम्योपैथी से अधिक किफायती और नेचुरोपैथी से कहीं आसान है। हिम्स भारत का पहला अस्पताल है जिसने पोस्च्युरल मेडिसिन के माध्यम से रोगियों को चिकित्सा प्रदान की है। हिम्स क्लीनिक में दवाओं का प्रयोग नहीं होता, बल्कि जीवनशैली में परिवर्तन करके और प्राकृतिक विधि से रोगियों को ठीक किया जाता है। इसे भारत का पहला एनएबीएच मान्यता प्राप्त आयुर्वेद पंचकर्म अस्पताल होने का गौरव भी प्राप्त है। उन्होंने कहा कि पैरों की ओर एक-दों ईंटों की मदद से यदि बैड को ऊंचा कर दिया जाये तो सिरहाना नीचा हो जाता है, जिससे हृदय की ओर रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है। गुरुत्वाकर्षण की इस शक्ति से डायलिसिस की अनिवार्यता खत्म हो जाती है। पोस्च्युरल मेडिसिन थेरेपी व्यापक रिसर्च पर आधारित है।

इस अवसर पर, आयुर्वेद विशेषज्ञ गुरु मनीष जी कहा ने कहा,”हम देश भर में अपने सौ से अधिक शुद्धि क्लीनिक्स में पोस्च्युरल मेडिसिन की सुविधा उपलब्ध करायेंगे। दिल्ली में हमारे 12 आयुर्वेदिक क्लीनिक हैं, जिन्हें सीजीएचएस और डीजीएचएस का अप्रूवल मिल गया है। इसके चलते सरकारी कर्मचारियों को हमारे अस्पताल में नि:शुल्क चिकित्सा मिल सकेगी। इस बीच, चंडीगढ़ और पश्चिम विहार, नई दिल्ली के अस्पतालों को एनएबीएच की मान्यता भी मिल चुकी है इन अस्पतालों में किडनी व लिवर की खराबी वाले, कैंसर और ऑटो इम्यून रोगियों का सफलतापूर्वक इलाज होता है।”

डॉ. बिस्वरूप रायचौधरी ने कहा, ”यह संभवतः दुनिया की पहली पुस्तक होगी जिसे पृथ्वी की महानतम शक्ति गुरुत्वाकर्षण को दवा के रूप में प्रयुक्त करते हुए, पोस्च्युरल विज्ञान पर लिखा गया है। इस पुस्तक को पढ़ने के बाद आप निश्चित रूप से मान लेंगे कि मौजूदा चिकित्सा तंत्रों जैसे एलोपैथी (आधुनिक चिकित्सा), होमियोपैथी, आयुर्वेद व नेचुरोपैथी आदि की तुलना में पोस्च्युरल विज्ञान सबसे तेज़, सुरक्षित और प्रमाणों पर आधारित विज्ञान है। इसके साथ-साथ इसे बिना किसी लागत के प्रयोग में लाया जा सकता है।”

डॉ. स्टीव बेदी (यूरोलॉजिस्ट, यू.एस.ए.), एडवोकेट नीलेश ओझा (प्रेसिडेंट, इंडियन बार एसोसिएशन) तथा नरेंद्र कुमार वर्मा (चेयरमैन, डायमंड पॉकेट बुक्स) ने भी मीडिया को संबोधित किया। हिम्स की टीम पोस्च्युरल मेडिसिन के साथ डायलिसिस/ किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट को उसी तरह चलन से बाहर करना चाहती है जैसे मोबाइल आने के बाद, पेजर चलन से बाहर हो गये थे। पोस्च्युरल मेडिसिन से इलाज करवाने के लिए रोगी को किसी प्रकार के रसायनों या दवाओं और उच्च तकनीकयुक्त उपकरणों पर निर्भर होने की आवश्यकता नहीं है। इसके अनेक उपाय तो ऐसे हैं जिन्हें किसी अन्य चिकित्सा विधि में पाने के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता। इस तकनीक से 70 प्रतिशत डायलिसिस रोगियों का डायलिसिस तुरंत रोका जा सकता है।

उच्च रक्तचाप के सौ प्रतिशत रोगी बिना किसी दवा के तुरंत अपने रक्तचाप को नियंत्रित कर सकते हैं। इस थेरेपी की मदद से किसी रोगी के हार्टअटैक को रोका जा सकता है। इसकी मदद से लिवर सिरोसिस को रोक सकते हैं। इस थेरेपी की सहायता से फाइबरोमाइल्जिया के रोगी को ठीक कर सकते हैं। अनिद्रा रोग का उपचार किया जा सकता है। इससे किसी विषैले जीव के काटने या डंक मारने से होने वाले दर्द का प्रभावी प्रबंधन हो सकता है। इसे थेरेपी की मदद से किडनी या लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत नहीं रहती। इन थेरेपियों में पार्किन्सन, अल्जाइमर जैसे न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों की चिकित्सा शामिल है। ये थेरेपियां अपनाने से रोगी पर हल्के एनेस्थीसिया जैसा प्रभाव होता है, जिससे उसके मन और शरीर को शांत होने में मदद मिलती है। किताब ग्रेड (ग्रेविटेशनल रेसिस्टेंस एंड डाइट) सिस्टम पर आधारित पोस्च्युरल मेडिसिन का परिचय देती है, जो व्यक्ति को इस योग्य बना देती है कि वह स्वयं 27 प्रमुख इमरजेंसी और जानलेवा दशाओं का प्रबंधन कर सकता है। किताब 1000 से अधिक सदस्यों वाले श्रीधर यूनिवर्सिटी सर्टिफाइड एक्सपर्ट नेटवर्क तथा 100 से अधिक हिम्स क्लीनिकों में उपलब्ध है।

पोस्च्युरल मेडिसिन विशेषज्ञ बनने हेतु लिंक: www.biswaroop.com/epm। निकटतम क्लीनिक तक जाने के लिए लिंक: www.biswaroop.com/hiimsclinic । हिम्स – हॉस्पिटल एंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिड मेडिकल सांइसेज़, पोस्च्युरल मेडिसिन के प्रशिक्षित स्टाफ सहित भारत का पहला अस्पताल है। इसमें प्रवेश के लिए निम्न लिंक पर जाएं: www.biswaroop.com/chdhospital

पोस्टुरल मेडिसिन : विशेषताएं

पोस्च्युरल साइंस सबसे तेज, सबसे सुरक्षित और साक्ष्य आधारित विज्ञान है।

इस तकनीक से 70% मरीजों का डायलिसिस तुरंत रोका जा सकता है।

उच्च रक्तचाप के 100% रोगी बिना किसी दवा के तुरंत अपने बीपी को नियंत्रित कर सकते हैं।

इस थेरेपी की मदद से मरीज को दिल का दौरा पड़ने से रोका जा सकता है।

इसकी मदद से लीवर सिरोसिस को रोका जा सकता है।

फाइब्रोमायल्गिया को ठीक किया जा सकता है और अनिद्रा का इलाज हो सकता है।

इससे जंतुओं के काटने या डंक मारने से होने वाले दर्द का प्रभावी प्रबंधन हो सकता है।

इस थेरेपी की मदद से किडनी या लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत नहीं पड़ती है।

पार्किंसंस, अल्जाइमर जैसे न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों का इलाज संभव है।

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